संभल के चर्चित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी का प्रमोशन, बने एडिशनल एसपी — खेल कोटे से इस मुकाम तक का सफर

संभल ज़िले के चंदौसी सर्किल में तैनात और अपने बेबाक बयानों व सख़्त कार्यशैली के लिए चर्चित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी को बड़ी सफलता मिली है। प्रमोशन के बाद अब वे एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) बन गए हैं। यह उपलब्धि उन्हें खेल कोटे से मिली नियुक्ति के बाद लगातार मेहनत, समर्पण और बेहतरीन कार्यप्रणाली के बल पर हासिल हुई है।

प्रमोशन का ऐलान और सम्मान

ताज़ा आदेश में सीओ (CO) पद पर कार्यरत अनुज चौधरी को एएसपी पद पर पदोन्नत किया गया है। प्रमोशन की औपचारिक घोषणा के बाद उनकी वर्दी पर अशोक स्तंभ लगाकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर SP केके बिश्नोई और ASP राजेश कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे।

खेल कोटे से पुलिस सेवा में आए अनुज चौधरी, राज्य में इस पद तक पहुंचने वाले पहले अधिकारी बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे खेल जगत के लिए गर्व का विषय है।

बेबाक बयानों से चर्चा में आए

अनुज चौधरी की पहचान सिर्फ एक अनुशासित और सख़्त पुलिस अधिकारी की ही नहीं, बल्कि एक ऐसे अफ़सर के रूप में भी है जो अपने विचार खुलकर रखते हैं।

  • होली और जुम्मे की नमाज़ विवाद: एक बार होली और जुम्मे की नमाज़ एक ही दिन पड़ने पर उन्होंने कहा था,

    “होली साल में सिर्फ एक बार आती है, जबकि जुम्मे की नमाज़ 52 बार। अगर किसी को होली के रंगों से परेशानी है, तो वे उस दिन घर पर रहें।”
    यह बयान उस समय सोशल मीडिया और मीडिया में खूब चर्चा का विषय बना।

  • संभल हिंसा पर बयान: हिंसा के दौरान उन्होंने कहा था,

    “मैं मरने के लिए फोर्स में भर्ती नहीं हुआ हूं।”
    उनके ये शब्द उस समय प्रशासनिक सख़्ती और पुलिस की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गए थे।

खेल से पुलिस तक का सफ़र

पुलिस सेवा में आने से पहले अनुज चौधरी का नाम खेल जगत में भी सम्मान से लिया जाता था। वे एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फ्रीस्टाइल पहलवान रहे हैं और कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

  • जन्मस्थान और शुरुआती जीवन: मूल रूप से मुजफ्फरनगर ज़िले के बहेड़ी गांव के रहने वाले हैं।

  • कुश्ती करियर:

    • 1997 से 2014 तक लगातार राष्ट्रीय चैंपियन रहे।

    • नेशनल गेम्स (2002 और 2010) में दो रजत पदक जीते।

    • एशियाई चैंपियनशिप (2005-2009) में भी पदक जीते।

    • 2010 के नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक हासिल किया।

    • 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

  • सम्मान और उपाधियां: उन्हें ‘शेर-ए-हिंद’, ‘भारत कुमार’, ‘उत्तर प्रदेश केसरी’ और ‘वीर अभिमन्यु’ जैसे ख़िताबों से सम्मानित किया गया।

खेल कोटे से PPS और फिर ASP तक

अनुज चौधरी ने वर्ष 2012 में स्पोर्ट्स कोटे के तहत प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) में प्रवेश किया। पुलिस में आने के बाद से ही उन्होंने अपनी मेहनत, निडर कार्यशैली और जनता से जुड़ाव के ज़रिए तेज़ी से पहचान बनाई।

संभल में हुई हिंसक घटनाओं में उनके त्वरित और निर्णायक एक्शन ने उन्हें न केवल विभाग में बल्कि आम जनता के बीच भी लोकप्रिय बना दिया।

लोगों की नज़रों में आदर्श अफ़सर

उनके सहयोगी और अधीनस्थ स्टाफ उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो टीमवर्क और अनुशासन पर ज़ोर देते हैं। जनता के बीच वे सुलभ, निष्पक्ष और निर्भीक अफ़सर की छवि रखते हैं।

खेल में उनकी पृष्ठभूमि ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी मानसिक और शारीरिक रूप से मज़बूत बनाए रखा है। यही वजह है कि वे पुलिस ड्यूटी के साथ-साथ खेल को भी बढ़ावा देने में सक्रिय रहते हैं।

आगे का सफ़र

एडिशनल एसपी बनने के बाद अनुज चौधरी की ज़िम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। पुलिस प्रशासन में उनकी मौजूदगी से उम्मीद की जा रही है कि वे कानून-व्यवस्था को और मज़बूत करेंगे, अपराध नियंत्रण पर और सख़्ती बरतेंगे तथा जनता के साथ भरोसे का रिश्ता और मज़बूत बनाएंगे।