सम्भल: जनपद सम्भल में किसानों की समस्याओं का अंबार लग गया है और प्रशासनिक लापरवाही के चलते स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। भारतीय किसान यूनियन (शंकर) के जिला अध्यक्ष ओमवीर सिंह यादव के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने खाद कटौती, गन्ना भुगतान में देरी, बिजली विभाग की मनमानी, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और गाँवों में गंदगी जैसी कई गंभीर समस्याओं को उठाया।
भाकियू (शंकर) के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

खाद कटौती और महंगे दाम पर बिक्री
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा खाद कटौती और महंगे दाम पर बिक्री का रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि जनपद सम्भल में कुछ व्यापारी और भ्रष्ट अधिकारी मिलकर खाद का काला बाज़ार कर रहे हैं। किसानों को प्रति बोरी खाद 450 रुपये के बजाय 600 से 700 रुपये में दी जा रही है, साथ ही खाद के साथ जबरन नैनो टोटल जैसी दवाइयाँ भी थमाई जा रही हैं।
किसानों का कहना है कि यह न केवल किसानों के साथ आर्थिक शोषण है, बल्कि कृषि लागत को भी अनावश्यक रूप से बढ़ा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों को खाद उचित दर पर उपलब्ध कराए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करे।
गन्ना भुगतान में देरी से किसानों पर आर्थिक बोझ
गन्ना किसानों ने बताया कि प्रति कुंतल गन्ने का रेट 450 रुपये तय है, लेकिन मिलों द्वारा समय पर भुगतान न मिलने के कारण किसानों को भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
भाकियू (शंकर) के नेताओं ने जिलाधिकारी से मांग की कि गन्ना मिलों को जल्द से जल्द किसानों का बकाया भुगतान करने के लिए निर्देशित किया जाए।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर भी किसानों ने नाराज़गी जताई। ज्ञापन में कहा गया कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी है। कई बार दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए मुरादाबाद या अन्य ज़िलों में रेफर करना पड़ता है।
किसानों का आरोप है कि कई स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से बंद पड़े हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग कागज़ों में उन्हें चालू दिखा रहा है। इससे ग्रामीण जनता, खासकर किसानों और मजदूरों को काफी परेशानी हो रही है।
बिजली विभाग की मनमानी
किसानों ने बिजली विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा गलत और अधिक बिल भेजे जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद विभागीय अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते।
किसानों ने मांग की कि बिजली बिलों की सही तरीके से जांच कराई जाए और गलत बिलों को तुरंत ठीक किया जाए।

ज़मीन से जुड़े विवाद और प्रशासन की अनदेखी
किसानों ने आरोप लगाया कि तहसील और जिला प्रशासन ज़मीन से जुड़े विवादों में अत्यधिक लापरवाही बरत रहा है। इससे किसानों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं।
गाँवों में गंदगी और बीमारियों का खतरा
ज्ञापन में ग्रामीण स्वच्छता की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। किसानों ने कहा कि जनपद सम्भल के अधिकतर गाँवों में गंदगी का ढेर लगा है, नालियां जाम हैं और बरसात में पानी भरने से मच्छर और अन्य बीमारियां फैल रही हैं।
उन्होंने मांग की कि नियमित सफाई और दवा का छिड़काव कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाया जा सके।

आंदोलन की चेतावनी
भाकियू (शंकर) के नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने इन समस्याओं का समाधान 15 दिनों के भीतर नहीं किया, तो किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

