मुरादाबाद: नगर निगम मुरादाबाद द्वारा साफ-सफाई और नियमित कूड़ा उठाने के दावे अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित नज़र आ रहे हैं। शहर के कई वार्डों, कॉलोनियों और स्थानों पर कूड़े के ढेर, जाम नालियां और फैली गंदगी स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

सुबह-सुबह कचरा न उठने के कारण दुर्गंध चारों ओर फैल जाती है। कई जगह नालियों से निकली कीचड़ खुले में पड़ी रहती है, जिससे मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ रहा है। बारिश के दिनों में जाम नालियों का पानी सड़क पर भर जाता है, जो संक्रमण और बीमारियों को न्योता देता है।

सफाई के दावों पर सवाल
नगर निगम ने लाखों रुपये खर्च कर शहर के प्रमुख चौराहों और दीवारों पर स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े स्लोगन लिखवाए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है।
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गली-मुहल्लों, सड़कों और खाली प्लॉटों पर कूड़े के ढेर जमा हैं।
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जाम नालियां और टूटी सड़कें सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही हैं।
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कई सफाई कर्मचारी कचरा उठाने के बजाय उसे जलाकर समस्या को निपटाने की कोशिश करते हैं।
स्थानीय लोग बार-बार शिकायत करने के बाद भी समाधान न मिलने से नाराज़ हैं। कूड़े से उठती बदबू के कारण लोगों का उन क्षेत्रों से गुजरना मुश्किल हो गया है।
वार्ड-27 का हाल बेहाल
वार्ड-27 स्थित आज़ाद नगर कॉलोनी में हालात बेहद खराब हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार,
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सफाई कर्मचारी समय पर नहीं आते।
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कचरा उठाने वाली गाड़ियां अनियमित रूप से चलती हैं।
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शिकायत नगर निगम के जेई शिव मोहन तक पहुंची, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह कटघर, गलशहीद, करुला और लाइनपार जैसे इलाकों में भी सफाई का अभाव है।

पार्कों की बिगड़ती तस्वीर
नगर निगम और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकसित कई पार्क भी बदहाली का शिकार हैं।
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झूले और स्लाइड टूटे पड़े हैं, जो बच्चों के लिए खतरा हैं।
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कई पार्कों की बाउंड्री वॉल टूटी हुई है, जिससे असामाजिक तत्वों का आना-जाना आसान हो गया है।
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पानी देने और घास काटने का काम नियमित नहीं होता, जिससे पार्क सूने और बेजान लगते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्कों से एंट्री फीस और मकान रजिस्ट्री के समय अतिरिक्त शुल्क लेने के बावजूद, रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
शहर की गंदगी मच्छरों और मक्खियों को पनाह दे रही है।
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डेंगू, मलेरिया और वायरल फीवर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।
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