मुरादाबाद। जिले में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, महंगी किताबों और बार-बार ड्रेस बदलने की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों पर बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
बैठक में जनपदीय शुल्क नियामक समिति, पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन (PTA) और विभिन्न निजी विद्यालयों के संचालकों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने साफ निर्देश दिए कि सभी स्कूल शासन के नियमों का पूरी तरह पालन करें और एनसीईआरटी पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों को प्राथमिकता दें।
डीएम ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने निजी स्कूलों द्वारा हर साल ड्रेस और किताबें बदलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति अगले 15 दिनों में जिले के विभिन्न स्कूलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
जांच के दौरान स्कूलों की फीस संरचना, किताबों की सूची, ड्रेस संबंधी नियम और शासनादेशों के पालन की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन यह भी जांच करेगा कि कहीं स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं कर रहे हैं।
बैठक में मौजूद अभिभावक प्रतिनिधियों ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी से आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस पर जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जिले में पारदर्शी एवं सुलभ शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

