मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में रामगंगा नदी ने एक बार फिर से अपने रौद्र रूप से लोगों को भयभीत कर दिया है। लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण रामगंगा का जलस्तर खतरनाक स्तर यानी लाल निशान को पार कर चुका है। इसके चलते कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य तेज कर दिए हैं।
बाढ़ की इस मार से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, एक किसान की पानी में डूबकर मौत हो गई, जबकि एक स्कूली छात्र नदी के तेज बहाव में बह गया, जिसकी तलाश अभी भी जारी है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, जबकि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

किसान की मौत, परिवार में मातम
मुरादाबाद के बिलारी तहसील के अंतर्गत आने वाले एक गांव में सोमवार सुबह एक किसान खेतों की तरफ गया था। अचानक पानी का बहाव बढ़ने से वह बाढ़ के पानी में फंस गया और डूब गया। ग्रामीणों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण उसे बाहर नहीं निकाल पाए। गोताखोरों की मदद से शव को बाहर निकाला गया। मृतक किसान के परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में शोक का माहौल है।
परिजनों ने बताया कि किसान सुबह-सुबह फसल की हालत देखने गया था, क्योंकि पानी खेतों में भर गया था। उसे अंदेशा नहीं था कि पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ जाएगा।
स्कूली छात्र बहा, बचाव अभियान जारी
इसी दौरान एक और दर्दनाक हादसा हुआ। बताया गया कि एक किशोर छात्र, जो अपने दोस्तों के साथ बाढ़ का पानी देखने गया था, गलती से नदी के तेज बहाव में गिर गया। घटना रामगंगा किनारे के एक गांव में हुई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ और गोताखोर मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू कर दिया।
गोताखोर लगातार तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक छात्र का पता नहीं चल सका है। परिजन और ग्रामीण नदी किनारे खड़े होकर अपने बच्चे के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

गांवों में पानी घुसा, सड़कें और फसलें डूबीं
रामगंगा का पानी बढ़ने से आसपास के कई गांवों में पानी भर गया है। निचले इलाकों में बने मकानों में पानी घुस गया है, जिससे लोग अपना सामान सुरक्षित जगहों पर ले जाने में जुटे हैं। कई ग्रामीण नावों की मदद से आवाजाही कर रहे हैं।
किसानों की हजारों एकड़ फसलें पानी में डूब चुकी हैं। धान, मक्का और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हुआ है। पशुओं के लिए चारे की कमी होने लगी है और कई जगह लोग अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं।
सड़क मार्ग पर भी पानी भर जाने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है।

प्रशासन अलर्ट, राहत कैंप स्थापित
बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अलर्ट घोषित कर दिया है। मुरादाबाद के जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की। प्रशासन ने कई स्कूल भवनों और पंचायत घरों को राहत कैंप में बदल दिया है, जहां विस्थापित लोगों को अस्थायी ठहराव, भोजन और चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी सक्रिय हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक न जाएं और बच्चों को नदी या नाले के पास न जाने दें।
पिछले वर्षों की बाढ़ का दर्द ताज़ा
स्थानीय लोग बताते हैं कि मुरादाबाद और आसपास का क्षेत्र हर साल मानसून में बाढ़ की मार झेलता है। 2010 और 2016 में भी रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया था, जिससे सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए थे। इस बार भी स्थिति लगभग वैसी ही बन गई है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि प्रशासन को स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए, क्योंकि हर साल बारिश के मौसम में यही संकट दोहराया जाता है। बाढ़ रोकने के लिए तटबंध और जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करने की मांग फिर से उठ रही है।
जलाशयों और पहाड़ी इलाकों से पानी छोड़ा गया
जानकारों के मुताबिक, उत्तराखंड के ऊपरी क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश हो रही है। टिहरी और अन्य जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद रामगंगा में पानी का स्तर तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि मुरादाबाद, अमरोहा और आसपास के जिलों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है।
मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जनजीवन ठप, लोग कर रहे हैं पलायन
कई प्रभावित गांवों के लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। जिनके पास साधन हैं, वे अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे हैं, जबकि बाकी लोग राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि बाढ़ के पानी से न केवल घरों और फसलों को नुकसान होता है, बल्कि पीने के पानी की भारी समस्या भी खड़ी हो जाती है। कुएं और हैंडपंप का पानी दूषित हो गया है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
सरकार से मुआवजे और पुनर्वास की मांग
किसानों और प्रभावित परिवारों ने सरकार से मुआवजा और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि हर साल नुकसान झेलना पड़ता है, लेकिन राहत और मुआवजा समय पर नहीं मिलता। कई बार तो प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि गरीब किसान आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
किसान संगठनों ने सरकार से आपदा राहत कोष से तत्काल सहायता देने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन की अपील
मुरादाबाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि बचाव कार्य लगातार जारी हैं और हर गांव में टीम भेजी जा रही है।
उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। जिन इलाकों में पानी का स्तर ज्यादा है, वहां नाव और मोटरबोट की मदद ली जा रही है।”
स्थिति पर नजर, लेकिन चिंता बरकरार
हालांकि प्रशासन लगातार काम कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों में चिंता कम नहीं हुई है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक, अगर अगले दो-तीन दिन भारी बारिश होती है, तो बाढ़ का पानी और फैल सकता है। इससे राहत और बचाव कार्यों में भी मुश्किलें बढ़ेंगी।
मुरादाबाद में रामगंगा नदी का लाल निशान पार करना केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि हर साल दोहराया जाने वाला संकट है, जो जान-माल दोनों पर भारी पड़ता है। किसान, मजदूर, छात्र — सभी प्रभावित हैं। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद, स्थायी समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है। फिलहाल, ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि पानी का स्तर जल्द घटे और जनजीवन सामान्य हो सके।

