नकली दूध पर रोक के लिए सरकार का सख्त अभियान शुरू, किसानों और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

उत्तर प्रदेश में नकली दूध की बढ़ती समस्या को लेकर सर्वहित कल्याण मोर्चा संगठन की मांग पर राज्य सरकार ने सख्त चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। यह कदम प्रदेश की जनस्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संगठन ने चेताया कि नकली दूध में डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज, रिफाइंड तेल जैसी हानिकारक चीज़ों की मिलावट की जाती है, जो लोगों की सेहत पर गंभीर प्रभाव डालती है। इससे न केवल स्वास्थ्य खतरे में है बल्कि दूध उद्योग की साख और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

UP government launches strict inspection campaign against fake milk to protect public health and dairy farmers

सर्वहित कल्याण मोर्चा के अध्यक्ष श्री मुकम्म्मिल हुसैन ने कहा, “राज्यभर में नियमित छापेमारी और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। नकली दूध के विरुद्ध लड़ाई में उत्पादन से लेकर बिक्री तक निगरानी जरूरी है।”

हालांकि, नकली दूध पर रोक के प्रयासों के साथ एक और बड़ी समस्या उभर कर सामने आई है – दूध के दामों में गिरावट। इससे प्रदेश के लाखों डेयरी किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। लागत से भी कम मूल्य मिलने के कारण पशुपालन और दूध उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

🔍 सर्वहित कल्याण मोर्चा ने दिए यह सुझाव:

  1. नकली दूध के विरुद्ध व्यापक छापेमारी और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई।
  2. खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम का कड़ाई से पालन।
  3. नकली दूध के दुष्परिणामों पर जनजागरूकता अभियान।
  4. डेयरी सहकारी समितियों को डिजिटलीकरण के माध्यम से सशक्त करना।
  5. पशुपालकों के लिए सब्सिडी और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करना।

सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है, लेकिन साथ ही किसानों को भी उचित मूल्य दिलाने के उपाय जल्द से जल्द किए जाने चाहिए ताकि नकली दूध की रोकथाम के साथ-साथ देश की डेयरी अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो।